Saturday, July 4, 2020

पूर्ण संत की क्या पहचान है ?

Ability of True Saint




श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 15 श्लोक 1 - 4, 16, 17 में कहा गया है जो संत इस संसार रूपी उल्टे लटके हुए वृक्ष के सभी विभाग बता देगा वह पूर्ण गुरु/सच्चा सद्गुरु है।
यह तत्वज्ञान केवल पूर्ण संत रामपाल जी महाराज ही बता रहे हैं। 
अवश्य देखें साधना चैनल 7:30 से 8:30 PM

True God
True God

Wednesday, July 1, 2020

सत्य परमात्मा कोन है?

सत्य परमात्मा कोन है ?



विश्व के सभी लोग यह मानते हैं कि इस संसार को चलाने वाली एक चेतन  शक्ति ( भगवान,god  ,परमात्मा) है परन्तु उसका स्वरूप क्या है, रूप क्या है ,इसके बारे मे जानते ही नही हैं। 

बड़ी मत भिन्नता है ।

हिन्दू  उस शक्ति को राम कहतें  है , कृष्ण  कहतें हैं, शिव कहतें है, विष्णु कहतें है  ,दुर्गा कहतें  है , क्रिश्चियन  ज्योति कहतें हैं , इस्लाम नूरे इलाही कहतें हैं , सिक्ख कहते हैं सत श्री अकाल निराकार , यहूदी जेहोबा कहते हैं । 

लेकिन सब कहते हैं कि वह चेतन शक्ति (भगवान ,अल्लाह ,गॉड )एक है तो प्रश्न यह है कि इतने स्वरुप क्यों ,इतने रूप क्यों,और इतनी मत भिन्नता क्यों, आखिर वह सबका  पिता , भगवान,ईश्वर कौन है ? जिसको दुनिया के सभी धर्मों के लोग मानते हैं।और जिसकी प्रार्थना, उपासना ,इबादत करते हैं।


आखिर हम कैसे जाने कि हमारा परम पिता परमात्मा कौन है? 

दोस्तों परम पिता परमात्मा को जानने की कुछ(पाँच)कसौटियां हैं ।

जिसके माध्यम से हम यह जान सकते हैं। कि परमात्मा कौन है ?

परमात्मा के पहचान की कसौटी :-

 (1) सर्व धर्म मान्य –

परमात्मा जो भी होगा वह सर्व धर्म मान्य होगा ऐसा नहीं कि किसी धर्म के लोग मानते हैं तो किसी धर्म के नहीं ।  

(2)सर्वोच्च –

परमात्मा सर्वोच्च है यानि उसका कोई माँ-बाप नहीं है,। बल्कि परमात्मा जगत के माता -पिता ,पितामह,गुरुओं के भी गुरु हैं।  

(3)सर्वज्ञ है – 

परमात्मा इस सृष्टि के आदि मध्य  अंत को  जानता है ।


(4)जन्म मरण से न्यारा “अजन्मा ” है – परमात्मा अजन्मा है वह जन्म मरण के चक्र में नहीं आता है।


(5)“सर्व शक्तिमान”है एवं गुणों में अनंत है।

परमात्मा सर्वशक्तिमान है वह सब कुछ करने में समर्थ है एवं गुणों में अनन्त है।

दोस्तों जब हम उपरोक्त कसौटी पर विचार करते हैं तो पाते हैं कि मात्र भगवान कबीर ही ऐसे हैं जो कि सभी कसौटियों पर फिट बैठते हैं ।

जिन्हें क्रिश्चियन कहते हैं “god is lite ,”यहूदी कहते हैं जेहोबा , बौद्ध धर्म में भी ज्योति के आकार के लाल पत्थर का उपयोग ध्यान करने में करते हैं।

जिनका नाम ही है स्वयंभू जो सर्वदा कल्याणकारी हैं।

जिनका कोई “माँ-बाप , “नहीं है यानी “सर्वोच्च “हैं।

सभी धर्मों के लोग जिन्हें मानते हैं यानी “सर्व धर्म मान्य” हैं।

सृष्टि के आदि मध्य अंत को जानने वाले ” सर्वज्ञ “हैं। 

जो “सर्वशक्तिमान” हैं एवं जन्म मरण से न्यारे हैं।

कबीर जी  के अलावा कोई भी उपरोक्त कसौटियों पर खरा नहीं उतरता है।

कबीर जी ही परम पिता परमात्मा हैं ।

जिन्हें सभी धर्मों के लोग कहते हैं, कि भगवान एक है। 

दूसरा कोई भी भगवान नहीं है। वह या तो देवता हैं या पैगम्बर परन्तु भगवान नहीं है।

यदि हम परमात्मा से अपना direct सम्बन्ध जोड़ लें तो हमारा जीवन सदा खुशहाल बना रहे।

परमात्मा भी हम आत्माओं की तरह आत्मा है ।

अन्तर सिर्फ  इतना है कि वह परम आत्मा है यह उसी तरह है जैसे मंत्री एवं प्रधानमंत्री ।

आत्मा जन्म मरण मे आती है परमात्मा जन्म मरण में  नहीं आता है। 


आत्मा शक्तिशाली है तो परमात्मा सर्वशक्तिमान, आत्मा ज्ञान स्वरूप है तो परमात्मा ज्ञान का सागर सर्वज्ञ है।

आत्मा प्रेम स्वरूप है तो परमात्मा प्रेम का सागर है, आत्मा आनन्द स्वरूप है तो परमात्मा आनन्द का सागर है, आत्मा सुख स्वरूप है तो परमात्मा सुख का सागर है।

आत्मा पवित्र  स्वरूप है तो परमात्मा परम  पवित्र है, आत्मा शांत स्वरूप है तो परमात्मा शान्ति का सागर है।

आत्मा भी सूक्ष्म से सूक्ष्म है तो परमात्मा भी सूक्ष्म से सूक्ष्म है (आकार में ) 

परन्तु  परमात्मा गुणों में अनन्त है ,शक्तियों में अनन्त है।

परमात्मा के कर्तब्य अलग हैं आत्मा के अलग हैं । 

परमात्मा का स्वकथित नाम कबीर है।
वर्तमान में वो परमात्मा जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के रुप में आये हुए है। उनकी अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए साधना चैनल पर शाम 7.30 बजे से 8.30तक मंगल प्रवचन ।

Kabir is God
Kabir is God