Saturday, July 4, 2020
Wednesday, July 1, 2020
सत्य परमात्मा कोन है?
सत्य परमात्मा कोन है ?
विश्व के सभी लोग यह मानते हैं कि इस संसार को चलाने वाली एक चेतन शक्ति ( भगवान,god ,परमात्मा) है परन्तु उसका स्वरूप क्या है, रूप क्या है ,इसके बारे मे जानते ही नही हैं।
बड़ी मत भिन्नता है ।
हिन्दू उस शक्ति को राम कहतें है , कृष्ण कहतें हैं, शिव कहतें है, विष्णु कहतें है ,दुर्गा कहतें है , क्रिश्चियन ज्योति कहतें हैं , इस्लाम नूरे इलाही कहतें हैं , सिक्ख कहते हैं सत श्री अकाल निराकार , यहूदी जेहोबा कहते हैं ।
लेकिन सब कहते हैं कि वह चेतन शक्ति (भगवान ,अल्लाह ,गॉड )एक है तो प्रश्न यह है कि इतने स्वरुप क्यों ,इतने रूप क्यों,और इतनी मत भिन्नता क्यों, आखिर वह सबका पिता , भगवान,ईश्वर कौन है ? जिसको दुनिया के सभी धर्मों के लोग मानते हैं।और जिसकी प्रार्थना, उपासना ,इबादत करते हैं।
आखिर हम कैसे जाने कि हमारा परम पिता परमात्मा कौन है?
दोस्तों परम पिता परमात्मा को जानने की कुछ(पाँच)कसौटियां हैं ।
जिसके माध्यम से हम यह जान सकते हैं। कि परमात्मा कौन है ?
परमात्मा के पहचान की कसौटी :-
(1) सर्व धर्म मान्य –
परमात्मा जो भी होगा वह सर्व धर्म मान्य होगा ऐसा नहीं कि किसी धर्म के लोग मानते हैं तो किसी धर्म के नहीं ।
(2)सर्वोच्च –
परमात्मा सर्वोच्च है यानि उसका कोई माँ-बाप नहीं है,। बल्कि परमात्मा जगत के माता -पिता ,पितामह,गुरुओं के भी गुरु हैं।
(3)सर्वज्ञ है –
परमात्मा इस सृष्टि के आदि मध्य अंत को जानता है ।
(4)जन्म मरण से न्यारा “अजन्मा ” है – परमात्मा अजन्मा है वह जन्म मरण के चक्र में नहीं आता है।
(5)“सर्व शक्तिमान”है एवं गुणों में अनंत है।
परमात्मा सर्वशक्तिमान है वह सब कुछ करने में समर्थ है एवं गुणों में अनन्त है।
दोस्तों जब हम उपरोक्त कसौटी पर विचार करते हैं तो पाते हैं कि मात्र भगवान कबीर ही ऐसे हैं जो कि सभी कसौटियों पर फिट बैठते हैं ।
जिन्हें क्रिश्चियन कहते हैं “god is lite ,”यहूदी कहते हैं जेहोबा , बौद्ध धर्म में भी ज्योति के आकार के लाल पत्थर का उपयोग ध्यान करने में करते हैं।
जिनका नाम ही है स्वयंभू जो सर्वदा कल्याणकारी हैं।
जिनका कोई “माँ-बाप , “नहीं है यानी “सर्वोच्च “हैं।
सभी धर्मों के लोग जिन्हें मानते हैं यानी “सर्व धर्म मान्य” हैं।
सृष्टि के आदि मध्य अंत को जानने वाले ” सर्वज्ञ “हैं।
जो “सर्वशक्तिमान” हैं एवं जन्म मरण से न्यारे हैं।
कबीर जी के अलावा कोई भी उपरोक्त कसौटियों पर खरा नहीं उतरता है।
कबीर जी ही परम पिता परमात्मा हैं ।
जिन्हें सभी धर्मों के लोग कहते हैं, कि भगवान एक है।
दूसरा कोई भी भगवान नहीं है। वह या तो देवता हैं या पैगम्बर परन्तु भगवान नहीं है।
यदि हम परमात्मा से अपना direct सम्बन्ध जोड़ लें तो हमारा जीवन सदा खुशहाल बना रहे।
परमात्मा भी हम आत्माओं की तरह आत्मा है ।
अन्तर सिर्फ इतना है कि वह परम आत्मा है यह उसी तरह है जैसे मंत्री एवं प्रधानमंत्री ।
आत्मा जन्म मरण मे आती है परमात्मा जन्म मरण में नहीं आता है।
आत्मा शक्तिशाली है तो परमात्मा सर्वशक्तिमान, आत्मा ज्ञान स्वरूप है तो परमात्मा ज्ञान का सागर सर्वज्ञ है।
आत्मा प्रेम स्वरूप है तो परमात्मा प्रेम का सागर है, आत्मा आनन्द स्वरूप है तो परमात्मा आनन्द का सागर है, आत्मा सुख स्वरूप है तो परमात्मा सुख का सागर है।
आत्मा पवित्र स्वरूप है तो परमात्मा परम पवित्र है, आत्मा शांत स्वरूप है तो परमात्मा शान्ति का सागर है।
आत्मा भी सूक्ष्म से सूक्ष्म है तो परमात्मा भी सूक्ष्म से सूक्ष्म है (आकार में )
परन्तु परमात्मा गुणों में अनन्त है ,शक्तियों में अनन्त है।
परमात्मा के कर्तब्य अलग हैं आत्मा के अलग हैं ।
परमात्मा का स्वकथित नाम कबीर है।
वर्तमान में वो परमात्मा जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के रुप में आये हुए है। उनकी अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए साधना चैनल पर शाम 7.30 बजे से 8.30तक मंगल प्रवचन ।
| Kabir is God |
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कबीर परमात्मा
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Thursday, June 25, 2020
Holy Bhagwat Geeta
आध्यात्मिक गुरु की आवश्यकता
हमारे जीवन मे गुरु की आवश्यकता बेहद जरूरी है। हमे अच्छा जीवन जीने के साथ साथ परमेश्वर की प्राप्ति के लिए परमात्म ज्ञान की जरूरत होती है। वह पूर्ति आध्यात्मिक गुरु ही करता है। आध्यात्मिक गुरु परमात्मा प्राप्ति के लिए मार्गदर्शक होते है तथा गुरु परमेश्वर के तुल्य होते हैं। गुरु हमे बुराई को त्यागने व अच्छे कर्म करवाने के लिए प्रेरित करते हैं।
जीवनकाल में गुरु बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर प्राप्ति के लिए बीच की कड़ी सतगुरु होता है। पूर्ण सतगुरु मनुष्य का मार्गदर्शक है, सच्चे गुरु की पहचान करें।
गुरु बनाना बहुत जरूरी है
गुरु, आत्म और परमात्म के बारे में ज्ञान बताते हैं तथा गुरु की आवश्यकता क्यों है यह भी गुरु ही समझाते हैं। गुरु हमे यह भी बताते हैं कि परमात्मा कौन है , कैसा है, कहाँ रहता है, तथा उनको प्राप्त करने की क्या विधि है, भक्ति का क्या उद्देश्य है। यह पूर्ण जानकारी केवल सतगुरु ही बता सकते हैं।
विष्णु जी के अवतार रामचंद्र जी ने वसिष्ठ जी व कृष्ण जी दुर्वसा जी को आध्यात्मिक गुरु बनाये । यह परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। इसलिए आम इंसान को भी गुरु बनाना अत्यंत आवश्यक है।
सात समुद्र की मसी करू लेखनी करू बनराय।
धरती का कागद करू गुरु गुण लिखा न जाय। ।
कबीर साहेब जी मे गुरु के गुणों के बारे में बताया है कि- सातों समुद्र की स्याही बना ले और धरती जितना बड़ा कागज बना ले उस पर गुरु के गुणों को लिखा जाए तो भी कम है। यानी गुरु में अपार गुण होते हैं। जितनी महिमा सुनाए उतनी ही कम है।
गुरु की आवश्यकता हमारे जीवन मे बेहद जरूरी है। हमारे सभी सद्ग्रन्थों में गुरु की महिमा लिखी हुई है तथा उनके गुणों का बखान किया गया है। मनुष्य जीवन का उद्धार करने के लिए गुरु की परम् आवश्यकता है। गुरु बिना मनुष्य परमात्मा प्राप्ति नही कर सकता तथा अपनी सुख प्राप्ति की इच्छा भी गुरु ही पूर्ण करता है। कोई भी सन्त या महापुरुष गुरु के बिना नही बनते। आज तक जितने भी महापुरुष हुए हैं वे सभी गुरु कृपा से ही उनका नाम हुआ है तथा युग युगान्तर तक उनकी महिमा बताई जाती है। गुरु के बिना मोक्ष का मार्ग किसी को भी नही मिल सकता है।
एक शिष्य को गुरु सत्य के मार्ग पर ले जाता है चाहे वह पूर्व में कैसे ही आचरण वाला हो। इस संसार मे 84 लाख प्रकार की योनिया बनाई गई है जो चींटी से लेकर हाथी तक है। एक जीवात्मा इन 84 लाख प्रकार की योनियों को अपने कर्म आधार पर भोगती है। इसके चक्र से वही बच सकता है जिसने सतगुरु से नाम दीक्षा लेकर भक्ति की है।
शास्त्रो में गुरु की सरन में जाने का प्रमाण
सतगुरु या तत्वदर्शी सन्त की शरण मे जाने के लिए पवित्र गीता जी को बोलने वाला ब्रह्म/काल भगवान अर्जुन को बताया है कि परम् सुख पाना चाहता है तो तत्वदर्शी सन्त की शरण मे जा , उनको भलीभांति दण्डवत प्रणाम करना तथा कपट छोड़कर सरलतापूर्वक प्रश्न करना जिससे वे तुम्हे परमात्म तत्व का उपदेश करेंगे। यानी परमात्मा प्राप्ति का मार्ग बताएंगे।
अब आपको समझ मे आ गया होगा कि गुरु बनाना जरूरी है।
गुरु की आवश्यकता | गसच्ची भक्ति का महत्व गुरु बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर प्राप्ति के लिए बीच की कड़ी सतगुरु होता है। पूर्ण सतगुरु मनुष्य का मार्गदर्शक है,
शास्त्रों में गुरु को भगवान से भी बड़ा बताया है। जैसे कबीर साहेब जी ने कहा है ,
गुरु गोविंद दोनों खड़े किसके लागू पाय।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो मिलाय।।
इसका भावार्थ है कि, गुरु और भगवान एक साथ खड़े हो तो सबसे पहले गुरु के चरण छुये, उसके बाद भगवान के। क्योकि गुरु की कृपा से ही भगवान मिला है।
सतगुरु की पहचान
सतगुरु की पहचान करना भक्ति मार्ग में बहुत जरूरी होता है।। वर्तमान में इस संसार मे गुरुओं की बाढ़ सी आ गई है इसमे सतगुरु की पहचान हमारे लिए आवश्यक है। सतगुरु की पहचान उनकी वेषभुषा या ऊपरी पहनावे से नही कर सकते। लेकिन सच्चे सतगुरु की पहचान करना बहुत आसान है अगर हम शास्त्रों का सहारा लेकर पहचान की जाए तो।
कबीर साहेब जी ने अपनी वाणियो में बताया है कि-
सतगुरु के लक्षण कहूँ मधुरे बेन विनोद।
चार वेद छ सास्त्र कहे अठारह बोध।।
कबीर साहेब जी कहते हैं कि सतगुरु उसे जानो जो चार वेद, 6 सास्त्र ओर अठारह बोध यानी सभी सद्ग्रन्थों को ज्ञान बताये तथा सास्त्र अनुसार भक्ति बताये वह सतगुरु होता है।
गीता अध्याय 15 स्लोकः 1 से लेकर 4 तक सतगुरु की पहचान बताई है । ऊपर को जड़ व नीचे को साखा वाले अविनाशी पेड़ के सभी विभाग जो बता दे वही वेदों को जानने वाले सन्त होते हैं।
सिद्ध तारे पिंड आपना, साधु तारे खण्ड।
सतगुरु सोइ जानियो जो तार देवे ब्रह्मण्ड।।
साधु व सिद्ध केवल इस सरीर या इस खंड यानी इस पृथ्वी को ही पार करवा सकते हैं। लेकिन कबीर साहेब जी ने बताया है कि सतगुरु वह होता है जो ब्रह्मण्डों को भी पार करवाकर परमेश्वर के निज लोक में निवास करवा दे। हम 21 ब्रह्मण्डों के स्वामी काल भगवान के लोक में रहते हैं। इनसे जो पार करवा दे वही सच्चा सतगुरु है। कबीर साहेब जी ने बताया है कि सतगुरु व परमात्मा में कोई अंतर नही समझना चाहिए। सतगुरु परमात्मा का ही रूप होता है। परमेश्वर कौन है ? कैसा है? कहाँ रहता है? यह जानकारी जो सन्त बता दे वही सतगुरु होता है।
वर्तमान मे सच्चा / पूर्ण सतगुरु कौन है?
एक समय मे एक ही सतगुरु होता है और वह केवल ज्ञान से ही पहचाना जा सकता है । वह पूर्ण सन्त या तत्वदर्शी सन्त केवल सन्त रामपाल जी महाराज है जो शास्त्रों के आधार पर पूर्ण रूप से खरे उतरते। वर्तमान में सन्त रामपाल जी महाराज जी के अतिरिक्त किसी के पास वास्तविक भक्ति मार्ग नही है। सतगुरु में जो गुण होने चाहिए वे सन्त रामपाल जी महाराज जी मे विद्यमान है। उन्होंने ही गीता अध्याय 15 स्लोकः 1 से लेकर 4 तक के श्लोकों का सही सही उत्तर बताये है।
जीवनकाल में गुरु बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। परमेश्वर पूर्ण सतगुरु मनुष्य का मार्गदर्शक है, सच्चे गुरु की पहचान करें। गुरु बनाना बहुत जरूरी है
सन्त रामपाल जी महाराज जी ने बताया कि-
अक्षर पुरुष एक पेड़ है निरंजन वाकी डार ।
तीनो देवा साखा है पात रूप संसार।।
ऊपर को जड़ रूपी परमात्मा है उसके नीचे तना जो जमीन से बाहर की तरफ होता है वह अक्षर पुरुष यानी परब्रह्म है। परब्रह्म से नीचे ब्रह्म है जिसे काल भी कहते हैं। उनसे नीचे तीन टहनियां जो तीनो देवता रूपी तीन गुण है। फिर अन्य छोटी टहनियां व पत्ते संसार कहा गया है। सन्त रामपाल जी महाराज सर्व धर्मो के सद्ग्रन्थों को सही सही बता रहे है।
तथा शास्त्रों में वर्णित विधि अनुसार तीन बार मे तीन मन्त्रो की दीक्षा देते हैं। जिनका प्रमाण गीता अध्याय 17 स्लोकः 23 में है।
वेदों में लिखा है कि पूर्ण सन्त से नाम दीक्षा लेकर भक्ति करने से साधक के सर्व पाप नाश होते हैं। सन्त रामपाल जी महाराज जी से दीक्षा लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करते हैं उनके पाप कर्म नाश होते हैं। तथा शारीरिक व आर्थिक लाभ भी प्राप्त होते हैं।
सन्त रामपाल जी महाराज ने सभी अनुयाईयों को अच्छे संस्कार युक्त बनाये है जिनकी समाज मे अलग पहचान बन गई है।
पूर्ण गुरु सन्त रामपाल जी महाराज द्वारा बताया गया ज्ञान जरूर देखें साधना TV पर शाम 7:30 से
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Wednesday, June 10, 2020
बाइबल
पवित्र बाइबल उत्पत्ति 1:29
जितने बीज वाले छोटे-छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर और जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं ,वे सब मैंने तुमको दिए हैं, वह तुम्हारे भोजन के लिए हैं।
स्पष्ट है परमेश्वर जी ने मनुष्य के खाने के लिए शाकाहारी भोजन दिया है। ईसाई भाई मांस खाकर प्रभु के आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं ।
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Monday, June 8, 2020
कुरान
मुस्लिम धर्म
पवित्र कुरान शरीफ में प्रभु सशरीर है तथा उसका नाम कबीर है का प्रमाण
पवित्र कुरान शरीफ़ से सहाभार ज्यों का त्यों लेख”
सुरत-फुर्कानि नं. 25 आयत नं. 52 से 59
(इन आयत नं. 52 से 59 में विशेष प्रमाण है)
(कृप्या देखें पवित्र कुरान शरीफ से ज्यों का त्यों फोटो कापी लेख)
आयत 52:- फला तुतिअल् - काफिरन् व जहिद्हुम बिही जिहादन् कबीरा(कबीरन्)।52।
तो (ऐ पैग़म्बर !) तुम काफ़िरों का कहा न मानना और इस (र्क़ुआन की दलीलों) से उनका सामना बड़े जोर से करो। (52)
आयत नं. 52 का ऊपर अनुवाद किसी मुसलमान श्रद्धालु का किया हुआ है। तत्वज्ञान के अभाव से ग्रन्थ के वास्तविक अर्थ को प्रकट नहीं कर सका। वास्तव में इसका भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी का खुदा (प्रभु) कह रहा है कि हे पैगम्बर ! आप काफिरों (जो एक प्रभु की भक्ति त्याग कर अन्य देवी-देवताओं तथा मूर्ति आदि की पूजा करते हैं) का कहा मत मानना, क्योंकि वे लोग कबीर को पूर्ण परमात्मा नहीं मानते। आप मेरे द्वारा दिए इस र्कुआन के ज्ञान के आधार पर अटल रहना कि कबीर ही पूर्ण प्रभु है तथा कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष करना(लड़ना नहीं) अर्थात् अडिग रहना।
आयत 58:- व तवक्कल् अलल् हरिूल्लजी ला यमूतु व सब्बिह् बिहम्दिही व कफा बिही बिजुनूबि अिबादिही खबीरा(कबीरा)।58।
और (ऐ पैग़म्बर ! ) उस जिन्दा (चैतन्य) पर भरोसा रखो जो कभी मरनेवाला नहीं और तारीफ़ के साथ उसकी पाकी बयान करते रहो और अपने बन्दों के गुनाहों से वह काफ़ी ख़बरदार है (58)
आयत संख्या 58 का ऊपर अनुवाद किसी मुसलमान भक्त का किया हुआ है जो वास्तविकता प्रकट करने में असमर्थ रहा है। वास्तव में इस आयत संख्या 58 का भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी जिसे अपना प्रभु मानते हैं वह कुरान ज्ञान दाता अल्लाह (प्रभु) किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर उस कबीर परमात्मा पर विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वह कभी मरने वाला नहीं है अर्थात् वास्तव में अविनाशी है। तारीफ के साथ उसकी पाकी(पवित्र महिमा) का गुणगान किए जा, वह कबीर अल्लाह(कविर्देव) पूजा के योग्य है तथा अपने उपासकों के सर्व पापों को विनाश करने वाला है।
आयत 59:- अल्ल्जी खलकस्समावाति वल्अर्ज व मा बैनहुमा फी सित्तति अय्यामिन् सुम्मस्तवा अलल्अर्शि अर्रह्मानु फस्अल् बिही खबीरन्(कबीरन्)।59।।
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Sunday, June 7, 2020
Kabir is God
कबीर परमात्मा सशरीर सतलोक से आते हैं, उनका जन्म नहीं होता।
जो देव जन्म मृत्यु के चक्कर में है उनकी जयंती मनाई जाती है लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है क्योंकि वो सत्यलोक से सशरीर पृथ्वी पर प्रकट होते हैं -
"गगन मंडल से उतरे सतगुरु पुरूष कबीर”
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सतलोक
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Saturday, June 6, 2020
पूर्ण परमेश्वर कबीर
"DivinePlay_Of_GodKabir"
ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में कबीर परमेश्वर जी काशी के लहरतारा तालाब पर कमल के फूल पर शिशु रूप में प्रकट हुए। इस लीला को ऋषि अष्टानन्द जी ने आंखों देखा।
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Tonk, Rajasthan 304001, India
Wednesday, June 3, 2020
कबीर जी की जयंती नही, प्रकट दिवस होता है
#KabirPrakatDiwasNotJayanti
🎆कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है, जयंती नहीं!
सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए।
पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता।
🎆कबीर साहेब का जन्म नहीं होता!
आदरणीय गरीब दास जी ने भी अपनी वाणी के माध्यम से यह बताया है कि परमात्मा कबीर जी की कोई माता नही थी अर्थात उनका जन्म माँ के गर्भ से नही हुआ।
गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदीछोड़ कहाय।
सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।।
#1DayLeft_KabirPrakatDiwas
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विक्रम
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कबीर ज्ञान
#DeepKnowlegde_Of_GodKabir
🌿कबीर परमेश्वर जी ने गुरू और सतगुरू में भेद बताया तथा सच्चे गुरु के लक्षण बताए।
सतगुरु के लक्षण कहु, मधुरे बेन विनोद, चार वेद छः सास्त्र, वो कह अट्ठारह बोध।।
कबीर साहेब जी ने तत्वज्ञान दिया कि मानव जीवन में सतगुरु बनाकर भक्ति करना परमावश्यक है। सच्चे गुरु की शरण में जाकर दीक्षा लेने से ही पूर्ण लाभ मिलेगा, अन्यथा मानव जीवन बर्बाद है।
वर्तमान में पूर्ण सतगुरु केवल संत रामपाल जी महाराज ही हैं। उनसे सतभक्ति प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करें।
#2DaysLeft_KabirPrakatDiwas
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सतगुरु अन्यथा
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Monday, June 1, 2020
कबीर परमेश्वर जी की लीला
#DivinePlay_Of_GodKabir
🔅कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना
पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की।
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शास्त्रार्थ
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कबीर परमात्मा के चमत्कार
#Miracles_Of_GodKabir
💥‘‘शिशु कबीर परमेश्वर का नामांकन"
जब कबीर साहेब का नाम रखने के लिए कुरान शरीफ पुस्तक को काज़ी ने खोला। प्रथम नाम ‘‘कबीरन्’’ लिखा था। काजियों ने सोचा इस छोटे जाति वाले का कबीर नाम रखना शोभा नहीं देगा। पुनः कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो।
सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख।
काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।।
#4DaysLeft_KabirPrakatDiwas
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कुरान
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